बीजापुर- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पूरे देश मे मनाई गई। इस दौरान सभी राजनैतिक दल, समाजसेवी संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद किया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने आजादी से लेकर अन्य महत्वपूर्ण लड़ाइयों में अपना अहम योगदान दिया लेकिन आजादी के आज इतने सालों बाद भी भोपालपटनम में राष्ट्रपिता की प्रतिमा की ओर किसी का ध्यान भी नहीं जा रहा है। पिछले 2 सालों से गांधी जी की प्रतिमा को एक कमरे में बंद करके रख दिया गया है वहीं गांधी चौक बिना प्रतिमा के 2 वर्षों से अधूरा है। इस गांधी चौक में प्रतिमा लगाने ना तो कांग्रेसी अपनी इच्छा जाहिर कर रहे हैं और ना ही और प्रतिमा का साफ-सफाई किया जा रहा है। जिससे देखा जा रहा है कि राष्ट्र पिता की प्रतिमा को नजरअंदाज किया जा रहा है मामले के बारे में जानकारी देते हुए कुछ लोगों ने बताया कि विगत कुछ वर्षों से गांधी जयंती के अवसर पर नए-नए आयोजनों के साथ ही राष्ट्रपिता का जन्मदिन बड़े धूमधाम से मनाया जाता है जहां कुछ लोग स्वच्छता को लेकर रैली निकालते हैं तो वहीं कुछ लोग शहर को पॉलीथिन मुक्त करने की बात कहते हैं लेकिन भोपालपटनम में यह सभी दावे सफेद हाथी की तरह साबित हो रहे हैं क्योंकि ना तो कांग्रेसी उसे देख रहे हैं और ना ही योजनाओं को लोगों तक बताया जा रहा है।
भारत की आजादी में बड़ी भूमिका निभाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी नगर के मुख्य चौराहे पर जिस जगह को गांधी चौक के नाम से जाना जाता था उस चौक से ग़ांधी जी की प्रतिमा दो साल पहले हटा दी गई है। सड़क निर्माण के दौरान गांधी जी की प्रतिमा बिच सड़क पर आ रही थी। निर्माण कपंनी ने प्रतिमा हटाकर नगरपंचायत को सुपुर्द कर दिया अब गांधी जी प्रतिमा नगरपंचायत के एक कमरे में रखी हुई है। एक तरफ स्वच्छता अभियान से लेकर कई अन्य योजनाएं चला रही है और आज गांधी जयंती पर जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित करके बापू को याद किया जा रहा है।
नगर में आज बुधवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर गांधी चौक सूनसान लग रहा है। गांधी जी के नाम पर चौक का नामकरण तो कर दिया गया है लेकिन चौक पर गांधी जी नहीं है। पूरे नगर में एक भी ऐसी जगह नहीं बची है जहां किसी महापुरूष की प्रतिमा स्थापित कर सके। एक समय नगर के ह्रदय स्थल गांधी चौक माना जाता था ग़ांधी जयंती के दिन नगरपंचायत के जनप्रतिनिधि फूल माला पहनाकर गांधी जयन्ती मनाया करते थे आज यह चौक वीरान लग रहा है।