पुलिस, सीआरपीएफ़, 9 वीं वाहनी और रेल्वे जैसी टीमें को रखा अलग पूल में

दंतेवाड़ा। ज़िला प्रशासन द्वारा शासकीय अधिकारी/कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं पत्रकारों के बीच सामंजस्य बनाने के उद्देश्य से माँ दंतेश्वरी क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन जिले में किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं बल्कि इस आयोजन के माध्यम से प्रशासन ने लोकतंत्र के सभी स्तंभों को एक साथ एक बैनर तले लाने का अपने आप मे एक अनोखा प्रयास भी है, जिससे सभी एक साथ मिलकर जिले के विकास में अपनी अग्रणी भूमिका निभा सके और दंतेवाड़ा विकास की नई ऊँचाइयों को छूकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करे। जिसके लिये दंतेवाड़ा कलेक्टर दीपक सोनी की जितनी भी तारीफ की जाये उतनी कम है।

लेकिन समिति में शामिल कुछ प्रशासनिक कनिष्ठ कर्मचारी आयोजन में जयचंदों की तरह भूमिका निभाकर प्रशासन की नज़रों में अपनी छवि बेहतर करने और नज़दीकियाँ बढ़ाने का इस आयोजन को एक अवसर की तरह बना लिया है। इसीलिए अब ये आयोजन आमजन चर्चा में महज एक औपचारिकता मात्र रहा गया है। क्योंकि समिति के चाटुकारों ने कलेक्टर एकादश को जिताने के लिये मानो पूरी तरह कमर कस ली है।क्योकि टीमों के पुल चयन से लेकर खिलाड़ियों के चयन में ये कर्मचारी गड़बड़ी कर सिर्फ कलेक्टर एकादश को जीतना चाहते हैं। ताकि अन्य टीम के जीतने की संभावना नगण्य शून्य हो जाये।

इस टूर्नामेंट में जिले के समस्त शासकीय विभागों की टीमों को स्थान दिया गया है। साथ ही जनप्रतिनिधि, पत्रकार, पुलिस बल, रेल्वे और सीआरपीएफ़ की टीमों को भी शामिल किया गया है। लेकिन प्रशासन की मंशा के विपरीत आयोजन समिति में शामिल कुछ जयचंदों ने इसे प्रशासन की नज़रों में अपनी छवि सुधारने और प्रशासनिक मुखिया का चहेता बनने का अवसर समझ लिया है।

आयोजन के अनुसार प्रतियोगिता में शामिल समस्त टीमों में केवल सम्बंधित विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को ही शामिल किया जाना है। लेकिन समिति में शामिल कुछ जयचंदों ने इस आयोजन की निष्पक्षता को तार तार कर दिया है। विजेता का खिताब कलेक्टर एकादश को दिलाने के लिये जिले के समस्त विभागों के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को इस टीम में रखा गया है। इस टीम में कलेक्टर कार्यालय से केवल एडिशनल कलेक्टर अभिषेक अग्रवाल को स्थान मिला है। इनके अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा, आरजीएम, ज़िला पुलिस बल, बीएसएनएल के चुनिंदा सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। जिन खिलाड़ियों को उनके मूल विभाग की टीम से खेलना था उन्हें इस टीम से खेलने को कहा गया है। इतना ही नहीं कलेक्टर एकादश की जीत में कोई संदेह न रहे इसके लिए सीआरपीएफ़, ज़िला पुलिस, 9 वीं वाहिनी, रेल्वे जैसी मज़बूत टीमों को बी पूल में रखा गया है। वहीं नगर पालिका, भू-अभिलेख, पीएचई, लोक निर्माण, कृषि, आरजीएम, आदिवसी विकास और राजस्व जैसी टीमों को ए पूल में रखा गया है जिसमें कलेक्टर एकादश भी शामिल है।

मतलब पहले तो जिले के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को कलेक्टर एकादश में रखा गया और उस पूल में ऐसी एक भी टीम नहीं रखा गया जो गलती से भी कलेक्टर एकादश को खेल मैदान में खेल की दम पर चुनौती दे सके। हद तो तब हो गई जब कलेक्टर एकादश के पहले मैच में आयोजन समिति में शामिल शासकीय कर्मचारियों द्वारा कलेक्टर एकादश की बैटिंग के दौरान चौकों और छक्कों पर हजारों रुपए की पुरस्कार राशि की घोषणा की जा रही थी। 3 छक्के पर 11 हजार तो 6 छक्कों पर 15 हजार तो बोलिंग के दौरान विकेट्स पर भी इनाम की घोषणा की गई लेकिन अन्य टीम की बैटिंग या बोलिंग के दौरान इन जयचंदों की ओर से कोई घोषण नहीं की गई। ऐसी हरकतों से न केवल खेल की गरिमा और मर्यादा भंग होती बल्कि सामने वाली टीम मनोबल भी धराशायी होता है।

कलेक्टर श्री दीपक सोनी ने कहा था इस आयोजन में बीच बीच में यहाँ की स्थानीय भाषा गोंडी और हलबी में भी कॉमेंट्री की जाए, लेकिन केवल कलेक्टर की उपस्थिति में ही गोंडी और हलबी में कॉमेंट्री की जाती है। अब दर्शकों ने भी इस आयोजन की निष्पक्षता पर सवाल करने शुरू कर दिए हैं। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कहा की यदि ऐसी ही टीम उतारनी थी तो आयोजन की आवश्यकता नहीं थी, बिना टूर्नामेंट कराए इस टीम को ट्राफ़ी दे देनी चाहिए। आयोजन को लेकर लोगों को उम्मीद थी की वे सभी विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को उन्हीं की टीम से खेलते हुए देखेंगे, लेकिन जयचंदों ने उनकी उम्मीदों पर पानी देर दिया। क्योंकि समिति के कुछ लोगों ने कलेक्टर एकादश को जिताने की ठान रखी है और इसके लिए सारे नियम क़ायदे ताक पर रख दिए गए हैं। अब ये आयोजन केवल औपचारिकता मात्र रहा गया है, क्योंकि समिति में शामिल कुछ लोगों ने इसे प्रशासन की नजरों में अपनी छवि बेहतर कर और नज़दीकी बढ़ाने के अवसर के रूप में देखना शुरू कर दिया है।