महिलाओं में दंतेवाड़ा और पुरुषों में शिक्षक संघ रही विजेता

स्वर्गीय सरित वट्टी की स्मृति में हुआ विभागीय टूर्नामेंट का आयोजन

स्वर्गीय सरित वट्टी की माता एवं पत्नी रही मुख्य अतिथि

दंतेवाड़ा@ कलेक्टर कार्यालय में सहायक ग्रेड 3 के पद पर पदस्थ रहे सरित वट्टी की स्मृति में शासकीय कर्मचारियों द्वारा क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया गया था। सरित लम्बे समय तक जनपद कार्यालय में पदस्थ रहे, जून 2018 में बीमारी के चलते उनका आकस्मिक निधन हो गया था। शासकीय अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा दंतेवाड़ा के आउटडोर स्टेडीयम में स्वर्गीय सरित वट्टी की स्मृति में विभागीय क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन करवाया गया. 22 फ़रवरी को शुरू हुए इस टूर्नामेंट का कल समापन हुआ। फ़ाइनल मुक़ाबले में स्व सरित वट्टी की माता एवं पत्नी को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया गया था।

स्व सरित वट्टी की स्मृति में आयोजित इस टूर्नामेंट में 26 विभागीय टीमों ने हिस्सा लिया था। जिसमें महिला और पुरुष दोनों वर्गों को शामिल किया गया था। चितालंका स्थित आउटडोर स्टेडीयम की दूधिया रौशनी में आयोजित यह टूर्नामेंट 22 फ़रवरी को शुरू हुआ था। पाँच दिनों तक चले इस टूर्नामेंट में दंतेवाड़ा ज़िले के शासकीय विभागों की 26 टीमों ने भाग लिया था। 26 फ़रवरी को टूर्नामेंट का फ़ाइनल मुक़ाबला खेला गया। महिला वर्ग का फ़ाइनल मुक़ाबला दंतेवाड़ा और कुआकोंडा के मध्य खेला गया, जिसमें कुआकोंडा को हराकर दंतेवाड़ा ने जीत दर्ज की। वहीं पुरुष वर्ग का फ़ाइनल मैच कलेक्टर एकादश व संयुक्त शिक्षक संघ के मध्य खेला गया। 12 ओवर के मैच में कलेक्टर एकादश ने पहले बल्लेबाज़ी करते 91 रनों का विशाल लक्ष्य खड़ा किया। लेकिन संयुक्त शिक्षक संघ के बल्लेबाज़ों ने अंतिम ओवर में एक विकेट से यह मैच जीतकर टूर्नामेंट अपने नाम कर लिया। फ़ाइनल मुक़ाबले को देखने बड़ी संख्या में दर्शक भी उपस्थित थे। विजेता टीम को स्व सरित वट्टी की माता धर्मी बाई व उनकी पत्नी अनाविका वट्टी द्वारा ट्राफ़ी प्रदान की गई। रजनीश ओसवाल को टूर्नामेंट का बेस्ट कीपर चुना गया, करण ठाकुर को बेस्ट बोलर और प्रमोद ठाकुर टूर्नामेंट को बेस्ट फ़ील्डर चुना गया, वहीं अमित को फ़ाइनल मुक़ाबले का मैन ऑफ़ द मैच चुना गया। इस आयोजन को सफल बनाने पीताम्बर माँझी, रवि करण, निलेश्वर सिन्हा, कोमत ठाकुर, कैलाश चंद, पी राजू, प्रमोद ठाकुर, नेपाल ठाकुर, तुका ठाकुर, संतोष प्रसाद करण ठाकुर व अशोक का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।