दंतेवाड़ा@ मजबूरी मजदूर बनाती है। घर से हजारों किलोमीटर दूर कोई युही रोजी-रोटी नही तलाशता ? झारखंड की तरफ निकलते मजबूर मजदूरों का जत्था भूखे प्यासे 4 दिनों से तेलंगाना से लगातार झारखंड के पलामू और गढ़वा जिले के लिए तपती-चिलचिलाती धूप में नंगे पांव ही जंगली रास्तो से पैदल ही झारखंड की दूरी नापने को चल रहा है

दरअसल सैकड़ो की संख्या में ये मजदूर तेलंगाना में एन्टीसीटी कुलिग पावर प्लांट में लंबे वक्त से काम कर रहे थे। पर मजदूरों ने कहा लॉक डाउन लगने से कमाया पैसा खाने में खर्च हो गया जब पैसा खत्म होने लग गया तो घर की निकलना मजबूरी हो गयी। 5 सौ 6 सौ रुपये ही बचे हैं। अगर जान सलामत रही तो पैसे फिर कमा लेंगे। ये सोचकर निकल गये है। बीजापुर में मजदूरों कोई मदद नही मिली। हाथो में कोरेंटिन करने की सील लगाकर उन्हें छोड़ दिया।
मजदूर थकते-रुकते उठते बैठते लगातार चल रहे है। बारसूर के एक युवक विष्णु ने इनके खाने पीने की व्यवस्था आजभर की है।

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सभी मजदूर शासन से मदद चाहते हैं। मजदूरों का कहना है कि शासन की तरफ से कोई भी मदद मिल जाती तो हम लोगो को राहत पहुँचती।
इस मामले में हमने बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी से सम्पर्क करना चाहा पर उनका फोन रिसीव नही हो सका।