दंतेवाड़ा @ जेष्ठ कृष्ण अमावस्या पर आज सुहागिन महिलाओं ने पति के दीर्घायु की कामना कर वट सावित्री की पूजा की। वट पूजा के दौरान महिलाओं ने वट वृक्ष में श्रृंगार सामग्री अर्पित कर अपने सुहाग की सलामती एवं सुख समृद्धि की कामना की और निर्जला व्रत रखा। वट सावित्री की पूजा दंतेवाड़ा समेत आसपास क्षेत्रो में भी पूरे विधी विधान के साथ किया गया।

पूजा अर्चना करती महिलाये

वट सावित्री की पूजा आज शहर भर में महिलाओं ने धूमधाम से की। यह हिदु वासियों का एक महवर्पूा व्रत है। इस दिन सयवान, सावित्री तथा यमराज की पूजा की जाने की परंपरा है।

दंतेवाड़ा में वट सावित्री की पूजा अर्चना

आज निर्जला व्रत रखकर सुहागिन महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर अपने पति के दीर्घायु व सुख समृद्धि की कामना करते हुए वट वृक्ष याने बरगद के पेड़ की पूजा की। एक पौराणिक कथा के अनुसार सयवान की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राण वापस लाकर उसे पुनर्जीवित किया था। इसके बाद से उसके नाम पर वट सावित्री की पूजा होने लगी। आज के दिन महिलाएं वट वृक्ष के नीचे मिट्टी की बनी सावित्री और सयवान तथा भैंसे पर सवार यम की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना करती हैं। वट की जड़ में पानी दिया जाता है। पूजा में पुष्प, रोली, काा सूत, भिगोया चना, फूल तथा धूप का इस्तेमाल किया जाता है। महिलाएं जल से वट वृक्ष को सींचकर तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटते हुए वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा करती है। तपश्चात वृक्ष के नीचे बैठकर सयवान व साविाी की कथा सुनी जाती है। वट सावित्री के शुभ अवसर पर आज नगर भर में सुहागिन महिलाओं ने अपने आसपास के वट वृक्षों में पूजा अर्चना की। पूजा करने वट वृक्ष के नीचे महिलाओं की काफी भीड़ लगी रही। पूजा के दौरान महिलाओं ने कोरोना से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए एक दूसरे से दूरी बनाकर बारी बारी से वट वृक्ष की पूजा अर्चना की। दंतेवाड़ा समेत गीदम, बारसूर, नकुलनार, बचेली, किरंदुल व कटेकल्यान में भी सुहागिनों ने ाुमााम के साथ वट-सावित्री की पूजा की ।