◆कागजो में समूहों का चलता बारसूर परियोजना में कारोबार देखिये वीडियो

दन्तेवाड़ा-प्रदेश के मुखिया सीएम भूपेश बघेल ने कुपोषण के खिलाफ बड़ी जंग सुपोषित अभियान की हाल ही में शुरूवात की ताकि दन्तेवाड़ा जैसे नक्सलग्रस्त संवेदनशील क्षेत्रो में कुपोषण को जड़ से खत्म किया जा सके। दन्तेवाड़ा जिले में अब भी तकरीबन 40% कुपोषण है। जबकि दर्जनों योजनाएं महतारी जतन,अमृत योजना,पूरक पोषण आहार योजना,गर्म भोजन योजना जैसे कार्यक्रम आईसीडीएस द्वारा चलाये जा रहे है।

लेकिन दन्तेवाड़ा के अंदुरुनी ग्राउंड की रिपोर्ट कुपोषण की इस जंग में कुछ और ही कुपोषित कहानी बयां कर रही है। पूरा मामला बारसूर परियोजना के समृद्धि स्वसहायता समूह का है। जिसके जिम्मे 23 आंगनबाड़ी केंद्रों के नौनिहालों के लिए पूरक पोषण आहार सप्लाई का जिम्मा मिला है। जिसे इन्द्रावती के पार सप्लाई करनी है। मगर ऐसा कुछ भी नही है मुचनार में बने इस केंद्र के गोडाउन पर जब मीडिया टीम ने दस्तक दी तो नजारा बेहद ही चौकाने वाला था कागज़ पर आकड़ो की दम पर चलने वाली नौनिहालों की इस योजना में महज चंद बोरिया नजर आई जिस पर घुन लगा पूरक पोषण आहार भरा था। वह भी 26 जून का बना दिखा जिस पर घुन रेंग रहे थे। सबसे बड़ी बात परियोजना में समृद्धि स्वसहायता समूह की अध्यक्ष चेरपाल की जनपद सदस्य मालती है। जो कि पहले आम्बा कार्यकर्ता थी बाद में नौकरी छोड़कर समूह चला रही है।

बारसूर परियोजना की अधिकारी कर्मा मैडम ने जानकारी दी कि लगातार चेकिंग हो रही है और समूह ठीक से सप्लाई कर रहै है। मगर सवाल यब उठता है कि जब सबकुछ ठीक है तो कबाड़ खाने की तरह समूह की सूरत क्यो। दरअसल कमीशनखोरी की जड़े दन्तेवाड़ा जिला में मजबूती से धंसी हुई है। जिसके चलते जिला कार्यक्रम अधिकारी से लेकर पूरा विभाग डकारने में मशगूल है। सरकारी दावेदारी की धज्जियां उड़ाने वाले इस जिले में यह पहला कारनामा नही है। जिले के कई हिस्सों में यही हाल है।