• पशु विभाग दन्तेवाड़ा द्वारा हितग्राहियो पर नाजायज दबाव बनाकर ओवर एज की बीमार बकरियों को ले जाने का प्रेशर बनाया जा रहा…
  • विरोध के बाद भी पशुविभाग के अधिकारियो द्वारा बकरियों को जबरन उनके गांव में ले जाकर छोड़ने की तैयारी..
  • हितग्राहियो ने कहा अगर जबरन लेकर छोड़ा गया तो वो उन बकरियों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर बकरियों को छोड़ आएंगे…!
आदिवासियों को डीएमएफ मद से दी गई बकरियों में से अधिकांश की मौत के बाद जब सोशल मीडिया में इस मामले को लेकर जमकर खिंचाई के बाद प्रशासन ने जिले से अधिकारियों को मामले की सत्यता को जानने के लिए सम्बंधित ग्रामो के प्रभावित किसानों के पास भेजा…. दल ने मामले की सत्यता के बाद पशु विभाग के अधिकारी को जमकर खिंचाई की ओर ऐसी योजना बन्द करने तक कह दिया… ज्ञात रहे की गीदम विकास खण्ड में जिला विकास निधि से 10 किसानों को कुल 110 बकरी बकरा दिया गया जिसने लगभग 50 से भी अधिक बकरियों की मौत एक सप्ताह के भीतर हो गई बकरियों के मरने ओर शासकीय नियमो को ताक मे रखकर ओवर एज की बकरी हितग्राहियो को दिए जाने के साथ बकरियों को पालने हेतु पशु विभाग द्वारा दाने के रूप में केवल 40 किलो चना छिलका हितग्राहियो को पकड़ा दिया गया.. यही नही इन हितग्राहियो को ये भी नही बताया गया की प्रत्येक हितग्राही के प्रकरण में कितने की राशि व कितना स्टीमेन्ट है… उन्हें ये पता है की डाक्टर अजमेरसिह ने 66000 रुपये जमा करने पर उन्हें 10 बकरी एक बकरा दिया…सबसे बड़ी बात यह है की आखिर इस शासकीय योजना का इन हितग्राहियों को जानकारी तक नही है की उनको कितना शासकीय फंडिंग हो रही है…एक बात यह भी सामने आ रही है की डीएमएफ मद से स्वीकृत राशि मे हितग्राही को बकरी पालन हेतु एक सेड भी बनाकर देना अनिवार्य था.. मगर बिना सेड के प्रभारी उपसंचालक डॉक्टर अजमेरसिह ने ओवर एज की बकरी बकरा की सप्लाई कैसे ओर क्यो..? की जब सेड ही नही बनाया गया था।इस सम्बंध में किसानों को जब पता चला की योजना में बकरी सेड भी है जो उन्हें नही बताया गया न उनको बनाकर दिया गया।आखिर सम्पूर्ण जानकारी को क्यो छुपाया जाता रहा इसके पीछे क्या मनसा थी उपसंचालक डॉक्टर अजमेर सिंह की… ये संदेह को जन्म देता है..प्रशासनिक अधिकारियों के स्थल निरिक्षण के साथ नाराजगी को देखते हुवे उन हितग्राहियो की बची बीमार बकरियों को उपसंचालक डॉक्टर अजमेरसिह दन्तेवाड़ा बुलाकर टेकनार शोध केंद्र में रखा तथा उन बूढ़ी ओर बीमार बकरियों का इलाज की व्यवस्था की अब पशु विभाग के अधिकारी पुनः उन्ही बकरियों को ले जाने हेतु टेकनार में हितग्राहियो को बुलाकर दबाव बना रहे है.. जिस पर हितग्राहियो ने नाराजगी व्यक्त करते हुवे ऐसी ओवर एज की बकरियों को ले जाने से इनकार करते हुवे अपने अपने घरों को चलते बने..इस सम्बंध में छिंदनार के योगेश ने बताया की हम किसी भी कीमत में ऐसे ओवर एज की बकरी नही लेगे.. हितग्राहियो ने बताया की टेकनार में पशु विभाग के दो डॉक्टर उन पर जबरदस्ती का दबाव बनाकर शासकीय नियमो के विपरीत जाकर हमे बूढ़ी ओर उम्र दराज बकरियां देने के लिए डॉक्टर अजमेरसिह के इसारे पर डॉक्टर दबाव बना रहे है..साथ ही पशु विभाग द्वारा उन्ही बकरियों को ग्राम तक पहुचाने की बात कह रहे है.. हम ऐसी बकरियां कदापि नही लेगे.. अगर जबरदस्ती पशु विभाग अपनी गाड़ी से लाकर हमारे ऊपर दबाव बनाकर छोड़ेगा… तो हम ऐसी बकरी लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर वही छोड़ आएंगे..! आखिर जब किसान ऐसी बकरियों को रखने या लेने के खिलाफ है तो फिर ऐसा दबाव किस लिये बनाया जा रहा..?इसकी गम्भीरता से जांच की आवश्यकता है साथ ही ऐसी योजना में कुल लागत व उसके सारे पहलुओं से किसानों को अवगत कराना चाहिए की इस योजना में शासकीय फंडिंग कितनी हो रही है ओर किस पर कितना खर्च होगा…जिससे शासकीय योजना की पारदर्षिता बनी रहे..!