दन्तेवाड़ा- सुर्खिया बटोरने वाले पोटाली गांव से जुड़ी खबरें रोजना मीडिया प्लेटफार्म फार्म में हर एंगल से रोजाना निकलकर सामने आ रही है. दरअसल हो भी क्यो न आज़ादी के बाद प्रशासन की पहुँच पोटाली तक हुई है। दरअसल मूलभूत समस्याओं से जूझता पोटाली गांव कुआकोंडा ब्लाक के अरनपुर थानाक्षेत्र का सुदूर वनांचल का गांव है। जहाँ नक्सलियों की पकड़ प्रशासन से कहि अधिक मजबूत थी। लेकिन हाल में ही पुलिस प्रशासन ने इस इलाके में एक डीआरजी के जवानों का कैम्प खोला है। जिस कैम्प को लेकर ग्रामीणों ने बगावत भी कैम्प लगने के पहले से कैम्प लगने के बाद तक कि थी। यहाँ तक कि ग्रामीणों की तरफ से हाईकोर्ट में भी एक याचिका लगाई गई है. जिस पर ग्रामीणों का तर्क है कि कैम्प लगाने की जगह से किसानों की जमीने प्रभावित होगी। किसी तरह का कैम्प लगाने में पेशा कानून 5 वी अनुसूची व ग्राम पंचायत की राय शुमारी नही ली गयी। इसलिए ग्रामीणों ने रैली से विरोध कई बार दर्ज करवा चुकी है. लेकिन पुलिस प्रशासन का कहना अगर माने तो ग्रामीणों के विरोध के पीछे नक्सली ताकते काम कर रही है. जिसके चलते डर व दहशत से ग्रामीण पहुँच रहे है.
दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन का कैम्प लगने के बाद से लगातार सामुदायिक पोलिसिंग के तहत ग्रामीणों के बीच सिविक एक्शन प्लान चलाकर क्षेत्र बहाली के लिए ग्रामीणों को रोजमर्रा के सामान बांटे जा रहे है. साथ मे पोटाली से अरनपुर तक 2007 से बंद पड़ी सड़क को भी सुरक्षा के साये में खोला जा रहा है. हाल में ही दन्तेवाड़ा कलेक्टर एसपी के साथ पोटाली गांव में पहुँचकर राशन दुकान पोटाली गांव में ही खोलने के साथ विस्थापित आश्रमो को पुनः चालू करने की बात कह चुके है।
इस इलाके से अपने अपने तर्को से विरोध और समर्थन की बाते निकल रही है। ग्रामीणों को डीआरजी के जवानों की कार्यशैली से नाराज़गी है। तो समाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी व हिमांशु कुमार इसी इलाके के भ्रमण कर जवानों पर कई आरोप जड़ चुके है. इसलिए पोटाली गांव जो कभी अंधेरे में था आज जमकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच अखबार के पन्नो में सुर्खियां बटोर रहा है।

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