स्टेट हाइवे से लगे गांव में चल रहा था इमारती लकड़ियों से फर्नीचर बनाने का गोरखधंधा, वनअमला बेखबर. बीजापुर :- बीजापुर के आवापल्ली वन परिक्षेत्र में स्टेट हाईवे से महज 200 मीटर की दूरी पर इमारती लकडीयों की अवैध कटाई कर फर्नीचर बनाने का गोरखधंधा पिछले एक महीने से चल रहा है। हैरान कर देने वाली बात यह है कि वन विभाग को इस गोरखधंधे की जानकारी ही नहीं।                                
बीजापुर के भोपालपटनम ब्लाॅक के बाद अब उसूर ब्लाॅक के  आवापल्ली में भी इमारती लकडीयों की कटाई कर फर्नीचर बनाकर बेचने का सिलसिला शुरू हो गया है। आवापल्ली वन परिक्षेत्र के दुग्गईगुडा के पटेलपारा निवासी धरमु बुरका के घर में पिछले 1 महीने से इमारती लकडीयों से फर्नीचर बनाने का काम चल रहा है। इसके लिए गांव में ही लगे विशालकाय सागौन के पेडों को काटकर फर्नीचर बनाया जा रहा है। सागौन पेड की कटाई के बाद चिरान बनाने के लिए बाकायदा आरा मशीन लगाया गया है। पेड काटकर चिरान बनाये जाने के बाद फर्नीचर बनाने के लिए तेलंगाना से कारीगर बुलवाये गये थे। करीब 1 महीने तक वन विभाग के नाक के नीछे ये गोरखधंधा चलता रहा मगर हैरान कर देने वाली बात यह रही कि इस बात की जानकारी उन्हें मीडीया के माध्यम से मिली। ग्रामीणों ने बताया कि आवापल्ली निवासी किसी व्यक्ति दारा पेडों को कटवाकर फर्नीचर बनवाया गया है। वहीं मामला प्रकाश में आने के बाद आवापल्ली वन परिक्षेत्र के रेंजर कोटेश्वर चापडी ने तत्काल कार्रवाई की बात कही है। मगर बडा सवाल यही कि स्टेट हाईवे से महज 200 मीटर की दूरी पर 1 महीने से बेखौफ होकर इमारती लकडीयों को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। तब ये वन अमला कहाॅं था।

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