दंतेवाड़ा@ दंतेवाड़ा जिला अस्पताल बीते 05 वर्षो से करोड़ो रुपये अस्पताल में कायाकल्प और सामान खरीदी के नाम पर खर्च कर चुका है. जिस खरीदी का कोई रंग-ढंग नही है, DMF मद की राशि का सबसे बड़ा दुरुपयोग इस समय दंतेवाड़ा में जारी है, दरअसल जिला अस्पताल प्रबंधन ने डीएमएफ में फर्जीवाड़ा करने के लिये पहले एक करोड़ चँतीस लाख रूपये प्रशासन से मांगे जबकि ये उपकरण इससे बहुत कम मूल्य में बाजार में उपलब्ध हैं। राशि प्राप्त होने के कुछ दिनों बाद एक बार फिर अस्पताल

फिर किया नियमों को दरकिनार

एक करोड़ चैंतीस लाख के उपकरणों की खरीदी में जो गलतियां या फिर चालाकी की, उसे चालीस लाख के उपकरण खरीदी में भी दोहराया। शासन को इस संबंध में एक पत्र लिख औपचारिकता पूरी की, जबकि नियमतः शासन स्तर पर तीन बार पत्र भेजे जाते है और यदि तीनों ही बार में किसी प्रकार का जवाब नहीं आता है तो प्रशासन इस मामले में उचित मार्गदर्शन प्रदान करता है। लेकिन दोनों ही मामलों में अस्पताल प्रबंधन ने शासन को औपचारिकता पूरी करते केवल एक बार ही पत्र भेजा और फिर प्रशासन से राशि की मांग की।

अधीक्षक ने जिला प्रशासन से सोनोग्राफी मशीन के लिए चालीस लाख रूपये की मांग की। राशि अस्पताल प्रबंधन को दे दी गयी है। लेकिन जिस एक उपकरण के लिये 40 लाख रूपये जिला अस्पताल को मिले हैं, वो उपकरण बाजार में 12 से 14 लाख में उपलब्ध है। बाजार में बेहतर से बेहतर एवं अत्याधुनिक स्पेशिफिकेशन

वाले सोनोग्राफी मशीन की कीमत 12 से 14 लाख बताई जा रही है। इस मशीन के लिये 40 लाख रूपये की मांग और उसके बाद प्राप्ति किसलिये हुई ये आम आदमी भी आसानी से समझ सकता है।

उपकरणों की तकनीकी जानकारी नहीं : फर्जीवाड़ा करने की जिला अस्पताल को इतनी जल्दबाजी है कि वो लिए गए हैं।

अस्पताल अधीक्षक का कहना है

12 लाख के सामान के लिये 40 लाख रूपये की मांग के सवाल पर अस्पताल अधीक्षक डॉ आरएल गंगेश का कहना है कि इंडियामार्ट में उस उपकरण का मूल्य 40 लाख रूपये दिखा रहा है, इस वजह से हमने 40 लाख रूपये मांगे हैं। हैरत की बात है कि अब जिला अस्पताल इंडियामार्ट, अमेजन, फ्लिफकार्ट जैसी ऑन लाईन खरीदी वाली वेबसाईट से देखकर अस्पताल के लिए आवश्यक उपकरणों की राशि तय कर रहे हैं।

क्रय समिति में तकनीकी जानकारों को भी रखना भूल गए। जिन उपकरणों की खरीदी की जानी है उनके स्पेशिफिकेशन के बारे में क्रय समिति के किसी भी सदस्य को कोई विशेष जानकारी नहीं हैं। पूर्व में भी डीएमएफ मद में करोड़ों के उपकरण बिना किसी तकनीकी जानकार के सलाह के

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