दन्तेवाड़ा@केंद्र और प्रदेश सरकार जहां गांव-गांव शौचालय बनवाने के दावे कर रही है इन दावों के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर इस मिशन को पूरा करने की ताल ठोकती रहती है। वहीं जमीनी हकीकत दन्तेवाड़ा में इससे कहीं कोसो दूर है। दन्तेवाड़ा जिले के पोन्दुम ग्राम पंचायत के बाहर खुले में शौच मुक्त का बोर्ड लगा हुआ है पर गांव में बने आधे अधूरे शौचालय इस पंचायत की और दन्तेवाड़ा जिला प्रशासन की पोल खोलने के लिए पर्याप्त नजर आ रहे हैं।

दरअसल दन्तेवाड़ा से महज कटेकल्याण मार्ग पर 15 किलोमीटर दूर इसी ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत पोन्दुम पड़ता है। जहाँ पंचायत के बाहर खुले में शौच मुक्त का संगमरमर के पत्थरो पर दावेदारी का बोर्ड लगा है, लेकिन गांव के अंदर एक भी शौचालय ठीक हालात में नहीं है। इस पंचायत में कुल 20 वार्ड और 688 घर हैं और लगभग 3000 से ज्यादा की आबादी है। मगर इन 688 घरों में पंचायत के बनाये शौचमुक्त का सपना सिर्फ़ बोर्ड तक ही सिमट कर रह गया। गांव के 20 वार्डो में THEAWARE.IN ने घुमा किसी शौचालय में सीट नही तो कही टैंक तो कही दरवाजा आज भी अधूरा पड़ा है। पानी की समस्या इतनी अधिक है गांव में लोग हंदाखोदरा की नदी पर निर्भर है। दैनिक कार्य के लिए अलिकोंटा में 60 घरों के लोग तो नदी ही जाते है। फिर भी इस गांव को शौचमुक्त कर बड़े भ्रष्टाचार को पंचायत कर्मियों से लेकर जिले अधिकारियों की मिलीभगत में अंजाम दे अंजाम दे दिया।

क्योकि शौचमुक्त पंचायत के नाम पर मिली जानकारी के मुताबिक प्रोत्साहन राशि के लिए 62 लाख रुपये इस पंचायत को 12 हजार रुपये पर शौचालय के नाम से मिले थे। मगर पैसों में 62 पैसे भी ग्रामीणों के हाथ नही लगे और सारी प्रोत्साहन राशि सरपंच सचिव के साथ ओडीएफ अधिकारियों ने हजम कर ली गयी। नदी पार बसे गोटखूंटापारा में 65 घर है। जब हम पहुँचे तो ग्रामीण सुखदास ने बताया कि सड़क तो है नही शौचालय हम लोग खुद से सरपंच और सचिव के बोलने से पहले कुछ घरो में बनवाये थे मगर उसका पैसा वर्षो बाद भी नही मिला। सचिव राजेन्द्र नेताम सिर्फ आश्वसन देते है कि पैसा नही मिला है।

इस तरह के भ्रष्टाचार से पोन्दुम पंचायत भरी हुई है। हमने मामले की पड़ताल करने जनपद सीईओ के दफ्तर पर भी पहुँचे पर वे नही मिले साथ ही सचिव सरपंच से लेकर अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास भी किया मगर किसी का फोन कवरेज के बाहर तो किसी ने फोन रिसीव करना ही मुनासिब नही समझा।

अन्दाज़ा लगाईये जब इस तरह से कागज़ी भ्रष्टाचार कर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में अवार्ड लेगा प्रशासन तो विकास क्या होगा?? जनाब सिर्फ संगमरमर के पाषाण पर गौरव गाथा न लिखिए इसे जमीनी जामी अमला पहनाइए तभी विकास दन्तेवाड़ा में संभव है।