दंतेवाड़ा@ दंतेवाड़ा में भ्रष्टाचार किस कदर चरम पर है, यह बात तो प्रदेशभर में चर्चित विषय बन गयी है। शिक्षा का क्षेत्र भी अब भ्रष्टाचार के रसातल से दंतेवाड़ा में डूबा नज़र आता है। मामला गीदम बीईओ शेख रफीक का जगजाहिर उजागर हुआ है। जहाँ शिक्षाकर्मी संघ ने बीईओ दफ्तर में एक महिला शिक्षिका के लिये बीईओ कार्यालय से गर्भपात पर अवकाश लेने के कारण जानने के प्रयास में एक विभागीय लेटर प्रताणित करने के लिए जारी कर दिया था। जिसके दंतेवाड़ा जिले के शिक्षक संघ ने बीईओ कार्यलय में बीईओ शेख रफीक पर रिश्वत लेने,महिला शिक्षिका को प्रताणित करने,एनपीएस की राशि पर डाका डालने जैसे गंभीर आरोप लगाते जमकर उनकी क्लास लेते नजऱ आये। जिसका वीडियो शोसल मीडिया में भी अब जमकर तैर रहा है। और शिक्षा विभाग दंतेवाड़ा की चाल चरित्र भी उजागर कर रहा है।

वही अब जानकारी मिल रही है कि शिक्षक संघ के माध्यम से एक महिला शिक्षिका ने गुहार लगाई है कि गीदम बीईओ तबादले पर भारमुक्त करने के लिए शिक्षिका से 5000 रुपये भारमुक्त करवाने के एवज में उक्त शिक्षिका से मांग लिये थे। अब जब बात उजागर हुई तो शिक्षिका ने वापस पैसे मांगने के लिए संघ के माध्यम से पत्रचार किया हैं। जानकारी के लिए बता दे कि जिस वक्त गीदम बीईओ शेख रफीक खान और शिक्षकों के बीच बहस हो रही थी तो उन्होंने काम के बदले पैसे की मांग अधिकारियों, नेताओ और पत्रकारों को देने के लिए मांग की बात कही थी.

अब सवाल यह उठता है कि गीदम बीईओ की इस धूर्त कार्यशैली पर जब सवालिया निशान उठने लगे हैं तब भी जिला शिक्षा अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी साबित करती है कि उन्हें इस तरह से भ्रष्टाचार करने के लिए अधिकारियों और नेताओं के साथ उन दलाल पत्रकारों का संरक्षण समर्थन मिला हुआ है जिन्हें वे गलत नीतियों के समर्थन के एवज में पैसे देते है।

शेष आरिफ गीदम बीईओ इन सब मामलों में गीदम बीईओ ने कहा मेरे ऊपर आरोप बेबुनियाद तरीके से लगाये जा रहे है। मैंने कभी पैसों की मांग नही की। जबसे गीदम में पदस्थ हूँ तभी से आरोप लगा रहे हैं।

आपको यह भी बता दे कि पुरानी प्रचलित कहावत है बिना आग लगे बाजार में धुंआ नही उठता। मतलब अगर गीदम बीईओ की कार्यप्रणाली निर्दोष है। तो फिर आरोप उन पर क्यो लगे? वह भी आरोप शिक्षकों ने लगाये जो कि दंतेवाड़ा जिले में ही सभी शिक्षक पदस्थ है। खैर अगर जिले शीर्षस्थ अधिकारी कलेक्टर स्वयं इस मामले पर बड़ी जांच बैठानी चाहिए। ताकि दोष साबित होने पर विभागीय कार्यवाही की जा सके।