बोधघाट परियोजना के विरोध में फूटे स्वर,

हितालकुडुम गांव में 03 दिनों तक बोधघाट समिति करेगी परिचर्चा

दंतेवाड़ा@ दंतेवाड़ा जिले के सरहदी जिले बीजापुर के हितालकुडुम गांव में हजारों की संख्या में आदिवासी लीडर देवी देवताओं(पेन )की पूजा व बोधघाट परियोजना पर चर्चा के नाम से 03 दिनों तक परिचर्चा की अनुमति के नाम से जमा हो रहे है।

देखिये ग्रामीणों के जमावड़े की तस्वीरें

दरअसल हाल में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दंतेवाड़ा प्रवास पर थे जहाँ उन्होंने बोधघाट परियोजना को लेकर जोर दिया साथ ही यह भी संकेत दिया था कि विरोध के बीच भी यह परियोजना शुरू करेंगे क्योकि यह किसानों के हितों से जुड़ी बात है। इस आमसभा के बाद ही बोधघाट परियोजना से प्रभावित लगभग 56 गांव के लोग लामबंध होकर विरोध करने की तैयारी में दिख रहे हैं। बेंगलुरु सरपंच सुखमन कश्यप ने कहा कि 40 साल पहले यही बोधघाट परियोजना शुरू की गई थी उस वक्त भी विरोध हुआ और काम बंद कर दिया गया अब फिर से उसी बन्द परियोजना को सरकार शुरू करना चाहती है। प्रभावित ग्रामीण जिसके लिए तैयार नही है। जान भले ही चले जायें पर परियोजना शुरू होने नही देंगे। सीएम साहेब ने दंतेवाड़ा में कहा था कि चाहे जितना भी विरोध की जोरआजमाइश कर ले पर बांध नही रुकेगा। इसलिये हमलोग 03 दिनों की परिचर्चा के लिये जमा हुये है।साथ ही 12 वर्षो में एक विशिष्ट पूजा अर्चना होती है, अबूझमाड़ में देवका राजा रहते है, इस दौरान उनकी भी पूजा होगी।

बता दे कि इस परियोजना के लगने से लगभग 56 गांव प्रभावित क्षेत्र में आयेंगे, जिनके लिये सरकार जमीन के बदले जमीन का मुवावजा देने की बात कह चुकी है. पर इन सबके बावजूद भी विरोध कर रहे ग्रामीण अपनी जमीन इस परियोजना के नाम पर नही देना चाहते।